“ दिन आता है हर रोज , और चला जाता है चुपचाप ! रात गहराती है कभी अंधेरों में तो कभी उदासियों में पर , वह कभी नहीं थमती ! समय बीतता है रुकता कभी नहीं ! रुकती हैं तो सिर्फ़ यादें … जिनमें थमी है कुछ कहानियां ! कुछ जिंदगियां ही कहानियां बनती है !