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पर्यावरण अध्ययन ( Environmental Studies ) Part – 5 [ Topic – ओजान परत क्षरण ( Ozone layer degradation ) ]

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Written by Nitin Gupta

नमस्कार दोस्तो , कैसे हैं आप सब ? I Hope सभी की Study अच्छी चल रही होगी 🙂 

दोस्तो जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पर्यावरण आजकल प्रत्येक Competitive Exams में बहुर ज्यादा पुंछा जाने लगा है , तो इसी को ध्यान में रखते हुये आज से हम अपनी बेबसाइट पर पर्यावरण अध्ययन ( Environmental studies ) के One Liner Question and Answer के पार्ट उपलब्ध कराऐंगे , जो आपको सभी तरह के Exam जैसे CTET ,  MP Samvida Teacher , MPPSC आदि व अन्य सभी Exams जिनमें कि पर्यावरण अध्ययन ( Environmental studies ) आता है उसमें काम आयेगी ! 

आज की हमारी पोस्ट पर्यावरण अध्ययन ( Environmental studies ) का 5th पार्ट है जिसमें कि हम ओजान परत क्षरण ( Ozone layer degradation ) से संबंधित Most Important Question and Answer को बताऐंगे ! तो चलिये दोस्तो शुरु करते हैं !

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ओजान परत क्षरण ( Ozone layer degradation )

  • ओजान परत मुख्‍यत- जहां अवस्थित रहती है, वह है – स्‍ट्रेटोस्‍फीयर
  • स्‍ट्रेटोस्‍फीयर (समतापमंडल) के निचले हिस्‍से में पृथ्‍वी से लगभग 10 से 50 किमी की ऊँचाई पर अवस्थित रहती है – ओजोन परत
  • ओजोन परत पृथ्‍वी से करीब ऊँचाई पर है –20 किलोमीटर
  • क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन के लिए सत्‍य नहीं है – यह ग्रीन हाउस प्रभाव में योगदान नहीं देती है
  • क्‍लोरीन, फ्लोरीन एवं कार्बन के मानव निर्मितयौगिक हैं – CFC
  • ओजोन छिद्र के लिए उत्‍तरदायी है – CFC
  • वायुमंडल में उपस्थित ओजोन द्वारा जो विकिन अवशोषित किया जाता है, वह है – पराबैंगनी
  • ऑक्‍सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली एक गैस है – ओजोन (O3)
  • ऊपरी वायुमंडल में ओजोन परत के रूप में पृथ्‍वी पर जीवन को बचाती है – अल्‍ट्रावायलेट किरणों से
  • ओजोन परत मानव के लिये उपयोगी है, क्‍योंकि – वह सूर्य की अल्‍ट्रावायलेट किरणों को पृथ्‍वी पर नहीं आने देती
  • वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत अवशोषित करती है – अल्‍ट्रावायलेट किरणों को
  • सूर्य से आने वाला हानिकारक पराबैंगनी विकिरण कारण हो सकता है –त्‍वचीय कैंसर का
  • अधिक समय तक सूर्य के पराबैंगनी विकिरण के शरीर पर पड़ने पर हो सकता है – डीएनए में आनुवांशिक उत्‍परिवर्तन
  • ‘ओजोन परत संरक्षण दिवस’ मनाया जाता है – 16 सितंबर को
  • क्‍लोरीन, फ्लोरीन एवं ऑक्‍सीजन से बना मानव निर्मित गैसीय व द्रवीय पदार्थ है जो कि रेफ्रिजरेटर तथा वातानुकूलित यंत्रों में शीतकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है – क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन
  • वायुमंडल के ध्रुवीय भागों में ओजोन का निर्माण धीमी गति से होता है। अत: ओजोन के क्षरण का प्रभाव सर्वाधिक परिलक्षित होता है – ध्रुवों के ऊपर
  • ओजोन परत को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाला प्रदूषक है – क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन
  • वायुमंडल में जिसकी उपस्थिति से ओजोनास्फियर में ओजोन परत का क्षरण होता है – क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन
  • ओजोनपरत की क्षीणता के लिए उत्‍तरदायी नहीं है – विलायक के रूप में प्रयुक्‍त मेथिल क्‍लोरोफार्म
  • ओजोनपरत की क्षीणता के लिए उत्‍तरदायी गैसें हैं – सीएफसी, हैलोजन्‍स, नाइट्रस ऑक्‍साइड, ट्राइक्‍लोरोएथिलीन, हैनोन-1211, 1301
  • वह ग्रीन आउस र्गस जिसके द्वारा ट्रोपोस्फियर में ओजोन प्रदूषण नहीं होता है – कार्बन मोनो ऑक्‍साइड
  • ओजोन छिद्र का निर्माण सर्वाधिक है – अंटार्कटिका के ऊपर
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जिसके रक्षण से संबंधित है, वह है – ओजोन परत
  • 1 जनवरी, 1989 से प्रभावी हुआ था – मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संबंधित है – ओजोन परत के क्षय को रोकने से
  • ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ संबंधित है –क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन से
  • समतापमंडल में ओजोनके स्‍तर को प्राकृतिक रूप से विनियमित किया जाता है –नाइट्रोजन डाइऑक्‍साइड द्वारा
  • ओजोन परत की मोटाई मौसम के हिसाब से बदलती रहती है। बसंत ऋतु में इसकी मोटाई सबसे ज्‍यादा होती है तथा वर्ष ऋतु में रहती है – सबसे कम
  • ओजोन परत को मापा जाता है – डॉबसन इकाई (Dobson Unit-DU) में
  • 00C तथा 1 atm दाब पर शुद्ध ओजोन की 01 मिमी की मोटाई के बराबर होता है – 1 डॉबसन यूनिट
  • क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन, जो ओज़ोन-ह्रासक पदार्थो के रूप में चर्चित हैं, उनका प्रयोग होता है – सुघट्य फोम के निर्माण में, ऐरोसॉल कैन में दाबकारी एजेंट के रूप में तथा कुछ विशिष्‍ट इलेक्‍ट्रॉनिक अवयवों की सफाई करने में
  • एक अत्‍यधिक स्‍थायी यौगिक जो वायुमंडल में 80 से 100 वर्षों तक बना रह सकता है – क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन
  • क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन, हैलोन्‍स तथा कार्बन टेट्राक्‍लोराइड तीनों ही पदार्थ हैं –ओजोन रिक्तिकारक
  • सीएफसी, हैलोन्‍स तथा अन्‍य ओजोन रिक्तिकराण रसायनों जैसे कार्बन टेट्राक्‍लोराइड के उत्‍पादन पर रोक लगाई गई है – मांट्रियल प्रोटोकॉल के अनुसार
  • अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र का बनना चिंता का विषय है। इस छिद्र के बनने का संभावित कारण है – विशिष्‍ट ध्रुवीय वाताग्र तथा समतापमंडलीय बादलों की उपस्थिति तथा क्‍लोरोफ्लोरोकार्बनों का अंतर्वाह
  • ऐसा माध्‍यम जहां क्‍लोरीन यौगिक ओजोन परत का विनाश करने वाले क्‍लोरीन कणों मे परिवर्तित हो जाते हैं – ध्रुवीयसमतापमंडलीय बादल
  • फ्रिजों में जो गैस भरी जाती है, वह है – मेफ्रोन
  • प्रशीतक के रूप में बड़े संयंत्रों में प्रयुक्‍त होती है – अमोनिया
  • सर्वप्रथम वर्ष 1985 में ‘टोटल ओज़ोन मैपिंग स्‍पेक्‍ट्रोमीटर’ की मदद से अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन छिद्र का पता लगाया था – ब्रिटिश दल ने
  • तिब्‍बत पठार के ऊपर वर्ष 2005 में ‘ओज़ोन आभामंडल’ (ओजोन हैलो) का पता लगाया – जी.डब्‍ल्‍यू. केंट मूर ने
  • मनुष्‍यों में खांसी, सीने में दर्द उत्‍पन्‍न करने के साथ-साथ फेफड़ों को भी क्षति पहुंचा सकता है – O3 का उच्‍च सांद्रण
  • सूर्य के उच्‍च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 प्रतिशत मात्रा अवशोषित कर लेती है (जो पृथ्‍वी पर जीवन के लिए हानिकारक है) – ओजोन परत
  • ओज़ोन का अवक्षय करने वाले पदार्थों के प्रयोगपर नियंत्रण करने और उन्‍हें चरणबद्ध रूप से प्रयोग-बाह्य करने (फेजि़ंग आउट) के मुद्दे से संबंद्ध हैं – मॉनिट्रयल प्रोटोकॉल

पर्यावरण से संबंधित अन्य पार्ट यहां पढें 

  1. पर्यावरण अध्ययन ( Environmental studies ) Part – 1 
  2. पर्यावरण अध्ययन ( Environmental studies ) Part – 2
  3. पर्यावरण अध्ययन ( Environmental Studies ) Part – 3
  4. पर्यावरण अध्ययन ( Environmental Studies ) Part – 4

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Nitin Gupta

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